रविन्द्र बंसल –
प्रयागराज। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को डबल पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने गुरुवार को दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर कर ली, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी। इस फैसले से पिता-पुत्र को राहत मिली है, लेकिन आजम खान की जेल से रिहाई को लेकर दूसरे मुकदमों की स्थिति अहम बनी हुई है। हाईकोर्ट का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब आजम खान और अब्दुल्ला आजम अपनी सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दे रहे हैं। अदालत ने सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग स्वीकार की, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई। यही इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। जमानत मिलने का अर्थ दोषमुक्त होना नहीं है और मामले में उनकी कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी।
आजम को 10 साल, अब्दुल्ला को सात साल की सजा
डबल पैन कार्ड मामले में रामपुर की अदालत ने नवंबर 2025 में आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद अपीलीय अदालत ने आजम खान की सजा बढ़ाकर 10 साल कर दी, जबकि अब्दुल्ला की सात साल की सजा बरकरार रखी। दोनों ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखीं। 15 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को अदालत ने सजा निलंबित करने और जमानत देने का आदेश सुनाया, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
क्या है डबल पैन कार्ड का मामला?
यह मामला अब्दुल्ला आजम के नाम पर कथित तौर पर दो अलग-अलग जन्मतिथियों वाले पैन कार्ड होने से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, दोनों कार्डों में जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज थी। आरोप है कि दस्तावेजों का इस्तेमाल निर्धारित आयु संबंधी पात्रता हासिल करने के लिए किया गया। इसी मामले में आजम खान पर कथित साजिश में शामिल होने का आरोप लगा। वर्ष 2019 में भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। निचली अदालत में सुनवाई के बाद पिता-पुत्र को दोषी ठहराया गया। दोनों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट से दोषसिद्धि पर रोक, सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग की थी।
जमानत के बाद भी आजम की राह में दूसरी बाधाएं
डबल पैन कार्ड मामले में राहत मिलने के बावजूद आजम खान की जेल से रिहाई दूसरे मामलों की स्थिति पर निर्भर कर सकती है। उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और उत्तर प्रदेश सतर्कता विभाग से जुड़े मामलों का भी उल्लेख सामने आया है। यदि किसी अन्य मामले में उनके खिलाफ प्रभावी गिरफ्तारी वारंट या न्यायिक हिरासत का आदेश लागू है, तो इस मामले में जमानत मिलने के बाद भी उन्हें जेल में रहना पड़ सकता है। हालांकि, किसी मामले का लंबित होना अपने आप में जेल में बने रहने का आधार नहीं है। उनकी रिहाई की वास्तविक स्थिति जानने के लिए दूसरे मामलों में जारी आदेशों और हिरासत संबंधी कानूनी स्थिति की पुष्टि जरूरी है। दूसरी ओर, अब्दुल्ला आजम की रिहाई की संभावना भी संबंधित मामलों में किसी अन्य कानूनी बाधा के न होने पर निर्भर करेगी।
दोषसिद्धि पर रोक नहीं, राजनीतिक भविष्य पर भी असर
हाईकोर्ट द्वारा दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज किए जाने का असर दोनों के राजनीतिक भविष्य पर भी पड़ सकता है। कानून के तहत दो साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराध में दोषसिद्धि होने पर जनप्रतिनिधित्व संबंधी अयोग्यता लागू हो सकती है। केवल जमानत मिलने या सजा निलंबित होने से यह अयोग्यता अपने आप समाप्त नहीं होती।
इसलिए आजम खान और अब्दुल्ला आजम को मिली राहत को उनकी राजनीतिक पात्रता बहाल होने के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसके लिए दोषसिद्धि पर रोक से संबंधित अलग न्यायिक राहत आवश्यक हो सकती है।
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने दोनों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद किए जाने की मांग भी की है। ऐसे में हाईकोर्ट के मौजूदा आदेश से उन्हें अंतरिम राहत जरूर मिली है, लेकिन सजा और दोषसिद्धि से जुड़े सभी विवादों का अंतिम निपटारा अभी बाकी है।
फिलहाल डबल पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम को जमानत मिल गई है, लेकिन दोषसिद्धि बरकरार है। अब आजम खान की जेल से रिहाई का रास्ता दूसरे मुकदमों की स्थिति से तय होगा, जबकि पिता-पुत्र की कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां अभी समाप्त नहीं हुई हैं।
