वॉशिंगटन/पेरिस। फ्रांस में बीते कई दिनों से जमकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। खराब शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों में टीचरों की कमी वगैरा का मुद्दा उठाकर प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं। पुलिस पर हमला और आगजनी की घटनाएं हुई हैं। फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों के बारे में दावा किया गया है कि इनको इंटरनेशनल नेटवर्क और विदेशी फंडिंग के सहारे किया जा रहा है। अब अमेरिका के फॉक्स न्यूज की पत्रकार असरा नोमानी ने चेतावनी दी है कि अगला टारगेट भारत को किया जा सकता है।
फॉक्स न्यूज ने फ्रांस में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बारे में दावा किया है कि कम्युनिस्ट और समाजवादी संगठनों का इंटरनेशनल नेटवर्क इनको अपने व्यापक राजनीतिक और वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में कर रहा। फ्रांस में हो रहे प्रदर्शन में वैसे ही तरीके अपनाए जा रहे, जो बीते दशक में अमेरिका में अशांति, अराजकता और मतभेद बढ़ाने में इस्तेमाल हुए। रिपोर्ट में ये दावा भी किया गया है कि विरोध प्रदर्शन को हवा देने वाले लोगों के साथ इस्लामी नेटवर्क भी शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शनों से फ्रांस से अमेरिका, ब्रिटेन, ग्रीस, ब्राजील और भारत तक अमीर लोग फायदा उठा रहे हैं।
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे लोग शिक्षा से संबंधित घरेलू विवाद को राजनीतिक और वैचारिक टकराव का बड़ा मंच बना रहे। इसके लिए अमेरिका में कम्युनिस्ट और इनके समूहों के नेटवर्क की फंडिंग हो रही। फॉक्स न्यूज ने दावा किया है कि फ्रांस में जिस आंदोलन को शिक्षा के क्षेत्र में गड़बड़ी के कारण बताया जा रहा, वो दरअसल यूनियनों, कम्युनिस्टों, एक्स्ट्रीम कम्युनिस्ट और इंटरनेशनल मीडिया के नेटवर्क का हिस्सा है। फॉक्स न्यूज ने फ्रांस के आंदोलन का दुनिया में प्रचार करने वाले 50 संगठनों की पहचान का दावा किया है। इनमें 15 छात्र या युवाओं का गुट है। जिनमें से कई कम्युनिस्ट और एक मुस्लिम छात्र संगठन हैं।
